उच्च जीवन

हो एक व्यापक दृष्टिकोण, सोच न संकुचित हो, न हो गौण! सागर सा हो हृदय विशाल, न कोई द्वेष, न मलाल! जीवन के प्रति हो उमंग, मन में उठती हो तरंग! दामिनी की भाँति धमनियों में दौड़ता हो रक्त, आभा ऐसी जिसे लखने थम सा जाए वक़्त! जीवन मूल्यों के प्रति हो अपार निष्ठा, जिससेContinue reading “उच्च जीवन”

जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति

जो जीता वही सिकंदर, जो हारे न उसके कुछ पल्ले, न उसके अंदर! जीतने वाले का जादू सिर चढ़ कर बोले, हारने वाले का तो जैसे सूरज ही अस्त हो जाए हौले हौले! जीतने वाले का सब लोहा मानें, हारने वाले को कौन है जाने? जीतने वाले का तो झूठ भी सच माना जाए, हारनेContinue reading “जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति”

दीपावली के शुभ अवसर पर—

इस दिवाली कर जीवन अपना प्रकाशित, स्वयं की गरिमा बढ़ा, सत्य को कर स्थापित, आत्मा को बना प्रहरी, असत्य को कर निष्कासित, छल कपट का साथ दे न कर स्वयं को श्रापित, धर्म की उठा पताका, स्वयं को बना सबल, इच्छा सर्वोत्तम जीवन जीने की हो जाए तेरी प्रबल, कर धारण ज्ञान को, अज्ञानता कोContinue reading “दीपावली के शुभ अवसर पर—”

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