दिल को दिल की राह होती है
सब को प्यार की चाह होती है
दिल ही दिल की भाषा जाने
प्रेम से ऊपर वह कुछ न माने
दिल न हो तो दुनिया सूनी
जैसे विशाल ऊसर मरुभूमि
दिल ही तो है जो रिश्ते सींचता
जन को जन की ओर खींचता
दिल की भाषा सुमधुर और प्यारी
घृणा और कटुता पर पड़ती भारी
दिल न होता तो प्रेम रस कौन पीता
रह जाता तब मानव शुष्क और रीता
दिल न हो तो जीना पड़ जाये भारी
चाहे मिले दुनिया की दौलत सारी
दिल से ही प्रभु प्रेम द्वार खुलता
जीवन में ईश कृपा रस घुलता!
रचनाकार
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul
