ख़ूबसूरत रिश्तों को नज़र

उमदा और ख़ूबसूरत रिश्तों की बात ही कुछ और होती है! वे होते हैं सर्दी की पीली धूप में खिले ख़ुशनुमा फूलों की तरह, वे होते हैं ताज़ी मीठी हवाओं के लहराते झोंकों की तरह, वे चमकते हैं जाढ़े की नम ओस के मोतियों की तरह, वे होते हैं एक मासूम बच्चे की बेबाक़ खिखिलातीContinue reading “ख़ूबसूरत रिश्तों को नज़र”

बाँवरा है, कुछ जानता नहीं

दिल है कि मानता नहीं, बाँवरा है, कुछ जानता नहीं! कभी इधर दौड़े,कभी उधर भागे, पूछो,”क्यों चैन नहीं तुझे, अभागे?” क्यों चाहे यह हर व्यंजन खाना, क्यों चाहे है सब कुछ पाना, क्यों यह हँसता, क्यों यह रोता, क्यों मौज की नींद नहीं यह सोता, क्यों जब डर से यह बैठा जाता, क्यों तब कुछContinue reading “बाँवरा है, कुछ जानता नहीं”

You Will Find Yourself To The Cosmic Rhythm Grooving

When you dispel from your mind ill-will and hate, You build for yourself a good fate! When you listen to voices sane, You let upon yourself blessings rain! When you see through your ego and conceit, You are able to transcend a life of deceit! When to the universe you open out your heart, RestContinue reading “You Will Find Yourself To The Cosmic Rhythm Grooving”

वक़्त अच्छा भी आएगा

वक़्त अच्छा भी आएगा, फिर सब कुछ भाएगा, फिर बजेगी मन की तार, फिर थिरकेंगे पाँव, फिर झूमेगी मस्त पवन सपनों की होगी उन्मुक्त उड़ान, लहराएँगे उम्मीदों के फिर परचम! बस्तियाँ होंगी फिर आबाद, फिर कहकहे गूंजेंगे, फिर महफ़िलों के दौर चलेंगे, फिर सजेंगी बारातें, फिर मिलेंगे हम सब गले जब मौत के मंडराते सायोंContinue reading “वक़्त अच्छा भी आएगा”

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