कभी तो —

क्यों न दें मिल कर इंसानियत का हवाला  तभी तो घुप अंधेरा छटेगा, होगा उजाला  क्यों न हम सब मिल कर दें दुआएँ  किसी को न दें दर्द, न किसी को रुलायें  क्यों न मज़लूमों की ओर हाथ हम बढ़ायें  ज़ुल्म-ओ-तशद्दुद , ज़ोर-ज़बर से बाज़ आयें  जंगों के पढ़ क़सीदे  क्यों दुनिया को भरमायें  क्योंContinue reading “कभी तो —”

On Redeeming Our Humanity

If we  have to hate someone, Let us hate ourselves for all our pettiness, All our narrow confines of the heart, All our self-love bordering on insanity, All our callous disregard for various life forms, All the thuggery of our knavish mind, All the priceless  things we  have taken for granted, All our inflated egoContinue reading “On Redeeming Our Humanity”

जब जागो, प्यारे —

जब जागो, प्यारे , तभी सवेरा  देखो दिन है कितना सुनहरा  उमड़ घुमड़ कर बादल आते  अमृतमय वर्षा  ये लाते  देखो पंछी मल्हार हैं गाते  उमंगें आशाएँ फ़िज़ा में तिरतीं   मस्त मलंग हवा है फिरती  वनस्पति पुलकित हो झूमे  आओ आनन्दित हो हम घूमें  तितलियाँ फूलों पर मंडरातीं  मकरंद सेवन कर इठलातीं  प्रकृति नेContinue reading “जब जागो, प्यारे —”

जब जागो, प्यारे —

जब जागो, प्यारे , तभी सवेरा  देखो दिन है कितना सुनहरा  उमड़ घुमड़ कर बादल आते  अमृतमय वर्षा  ये लाते  देखो पंछी मल्हार हैं गाते  उमंगें आशाएँ फ़िज़ा में तिरतीं   मस्त मलंग हवा है फिरती  वनस्पति पुलकित हो झूमे  आओ आनन्दित हो हम घूमें  तितलियाँ फूलों पर मंडरातीं  मकरंद सेवन कर इठलातीं  प्रकृति नेContinue reading “जब जागो, प्यारे —”

हरि चरणों में अर्पित कुछ शब्द  कृष्ण हमें प्राणों  से प्यारे हैं  हम सब के वे राज दुलारे हैं  बंसी वाले का जन्मदिन आया  हम सब ने है परम सुख पाया  बाँके बिहारी की  जय जयकार  हर ओर रहा हरि नाम  गुंजार  हरि ने जो छेड़ी मुरली की मधुर तान  स्पंदित हुई सृष्टि सुन अलौकिकContinue reading

Friends: God’s Special Blessings

Count friends as God’s special blessings,  They are nature’s finest dressings!  They are always there to prop you up, Heavenly it is with them to share yourself and sup!  With them around,  you are always on cloud nine, With them around,  everything is just fine!  They are our reservoir of laughter and mirth, With themContinue reading “Friends: God’s Special Blessings”

कुछ तो है …

कुछ तो है जो शूल बन के चुभ रहा  कुछ तो है धीरे-धीरे बुझ रहा  कुछ तो है जो कर रहा है आहत  कुछ तो है जो मिटा रहा हर चाहत  कुछ तो है घाव बन के रिस रहा  काल चक्र में है पिस रहा  कुछ तो है जो जाते-जाते कर रहा प्रहार कर रहाContinue reading “कुछ तो है …”

और नहीं बस और नहीं

ज़िंदगी के मरहलों से गुज़रता  मैं सोचता हूँ बस अब और नहीं  बेवजह खाना पीना और नहीं  बेतुका बोलना अब और नहीं  फालतू सोचना अब और नहीं   उठा पटक कतई और नहीं  वक्त की बर्बादी और नहीं ज़हरीली बातों पे गौर नहीं  आगे दौड़ पीछे चौड़ नहीं  बेचैनी रातों की अब और नहीं रस्साकशी बातोंContinue reading “और नहीं बस और नहीं”

क्या है ये ज़माना…

कैसा बोझिल समा कैसी ये तन्हाई है  यूँ लगता है जैसे जान पे बन आई है  कैसा ये मंज़र कैसी खुश्क हवाएँ हैं  जिस और देखूँ जफ़ाएँ ही जफ़ाएँ हैं  क्यों कर  बोलूँ बोलने पर तो पहरे हैं  किसे सुनाऊँ दास्ताँ सब तो यहाँ बहरे हैं  खुदगर्ज़ी के पहाड़ मुँह बायें खड़े हैं सामने  कौनContinue reading “क्या है ये ज़माना…”

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