भूल-चूक जी माफ करो
नये साल में मन साफ़ करो
नये साल की नयी कहानी
रगों में हो इक नयी रवानी
नये साल की हों नयी उमंगें
मन में हों पल्लवित नयी तरंगें
नये साल की नयी हो बोली
प्रेम-प्यार की खेलें होली
नये साल की नयी हो बातें
निकले सूरज,छँट जाएँ रातें
नये साल के नये इरादे
पूरे करें जो किए हों वादे
नये साल के नये हों रंग
मोह भ्रम सब हो जायें भंग
देखो,नयी मंज़िलें देती सदायें
उन की तरफ़ हम कदम बढ़ाएँ!
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul
