Dedicated to my decidedly better half on her birthday. God bless her!
उसने जो मेरे दर्द को अपना बना लिया
उसकी इसी अदा पर मैं फ़िदा हो गया
वो जो तूफ़ानों में खड़ी हुआ मेरे साथ
लगा कि खुदा ने सर पे रख दिया हाथ
यूँ तो ज़िंदगी जैसे तैसे हो ही रही थी बसर
उसका साथ बन गया आब-ए- हयात का असर
मालूम नहीं कब वो हमदर्द बन गई हमराह
कौन पा सका है क़ुदरत के करिश्मों की थाह
क्या मेरी लियाक़त कहाँ है मेरी औक़ात
कि खुदा की रहमतों की मैं कर सकूँ बात
-आब-ए-हयात = अमृत
लियाक़त = योग्यता
अरुण भगत
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