हरि चरणों में अर्पित कुछ शब्द 

कृष्ण हमें प्राणों  से प्यारे हैं 

हम सब के वे राज दुलारे हैं 

बंसी वाले का जन्मदिन आया 

हम सब ने है परम सुख पाया 

बाँके बिहारी की  जय जयकार 

हर ओर रहा हरि नाम  गुंजार 

हरि ने जो छेड़ी मुरली की मधुर तान 

स्पंदित हुई सृष्टि सुन अलौकिक गान 

गोपियों संग प्रभु रास रचायें 

खा उनका माखन भोग लगायें 

मीरा के प्रभु गिरधर नागर 

राधा के अथाह प्रेम सागर 

सखा आया सुन दौड़े आए 

सुदामा के तन्दुल प्रेम से खाये 

उसकी आशंकाओं का ले संज्ञान 

अर्जुन को दिया दुर्लभ  गीता ज्ञान 

देवकी नंदन गोविन्द गोपाल 

यशोदा के प्यारे बाल गोपाल 

हुए हम धन्य हरि धरती पर आए 

प्रभु दर्शन कर सब सुख पाये 

हरि नाम भाव सागर पर ले जाये 

हम सब की नैया को पार लगाये 

जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ 

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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