वो कौन है जो बन मेरा मुर्शिद
हर घड़ी मुझे राह दिखाता है
पल-पल मेरा हौंसला बढ़ाता है
टेड़े रस्तों पे भी फ़ख़्र से चलाता है
कौन है जो गहरी उदास शामों को
जला उम्मीद की शमा रौशन बनाता है
बैचैन बे-करार लम्हों में मुझे
सकूँ और चैन की नींद सुलाता है
कौन है जो उस मीठी नींद से जगा मुझे
खूबसूरत सहर से रू-ब-रू कराता है
कौन है जो बेहतरीन रूहों से मिलाता है
इलाही इल्म की अलख जगाता है
दुश्वारिओं को दूर किए जाता है
इक नूरी दुनिया की ओर लिए जाता है
कौन है वो ?
*मुर्शिद = guide
सहर= morning
इलाही इल्म = divine knowledge
दुश्वारियां = difficulties
नूरी दुनिया = a world of celestial light
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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👌👌👌
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Thank you very much, Ankit dear! God bless you!
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