
शिव भक्ति है परमानंद
आदि शिव, शिव ही अंत हैं
तेजोमय शिव, शिव प्रचंड हैं
शिव भक्ति, शिव ही युक्ति
शिव साधना, शिव ही मुक्ति
कण-कण में शिव हैं व्याप्त
शिव से होते सब साधन प्राप्त
शिव करुणा, शिव ही क्षमा
मुक्त होवे जो है शिव में रमा
शिव ही मन, शिव ही बुद्धि
शिव से ही हो अंतर्मन की शुद्धि
शिव ही जड़, शिव ही चेतन
शिव ही बाह्य, शिव निकेतन
शिव साधना, शिव ही साध्य
शिव सर्वव्यापक परम आराध्य
शिव चरणों में अर्पित
अरुण भगत
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