मैं आसमां में उड़ता इक परिंदा हूँ
मरा नहीं अभी मैं ज़िंदा हूँ
अभी सितारों के साथ मेरा सफ़र बाक़ी है
ख़्वाब मेरे नूरी हैं हस्ती चाहे मेरी ख़ाकी है
अभी तो पार करनी हैं बहुत सी मंज़िले
यूँ ही चलेंगे अभी ज़िंदगी के सिलसिले
यूँ ही रहेगी ये अज़ीम जद्दोजहद ज़ारी
यूँ ही बुलंद हौंसलों से खेलेंगे अपनी पारी
अभी तो बड़ी शिद्दत-ओ-ज़हानत से जीना है
मोहब्बतों का जाम दिल खोल के पीना है
जब तक इन रगों में खून की रवानी है
अभी तो कितने दिलों में जगह बनानी है
अभी तो इलाही इश्क़ का दरया पार करना है
अभी तो ख़ुदा की नेमतों से झोली को भरना है
अभी सितारों के साथ मेरा सफ़र बाक़ी है
ख़्वाब मेरे नूरी हैं हस्ती चाहे मेरी ख़ाकी है
अरुण भगत
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