मौज लो और रोज़ लो,
न मिले तो खोज लो,
कोई पल न आएगा दुबारा,
यह जान लो और सोच लो,
जिस राह पर दुश्वारियाँ बढ़ें,
उधर जाते कदम रोक लो,
ख़ुशियों का हो जो दिखता रेला,
अपनी ओर उसे मोड़ लो,
तारों की फैली इस चादर को
बढ़ा हाथ तुम ओढ़ लो,
बहते दरिया की रवानगी से
ख़ुद का नाता जोड़ लो,
बोझ बन गये जो रिश्ते,
उनसे नाता तोड़ लो,
जो बशर फैलायें ख़ुशबू,
उनसे रिश्ता जोड़ लो,
ज़िंदगी जब ले इम्तहां,
उसे कहो,”लो और लो,
बिकाऊ नहीं मेरा ज़मीर,
सोने में चाहे मुझे तोल लो”…
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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Nice 👏
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Thank you, dear! Stay blessed.
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Kya baat hai sir😍❤️
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बहुत बहुत शुक्रिया, साहिल! खुश रहो!
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🤣🤣🤣
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👌👌👌
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Thank you very much, Ankit dear! Hope you are doing good. Stay blessed.
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