अपने वतन से प्यार कर

गणतंत्र दिवस पर अपने प्यारे देश के हर बाशिंदे के नाम यह पैग़ाम

अपने वतन से प्यार कर,

इस पे जाँनिसार कर,

जिसकी गोद में तूँ पला,

उसपे क्यों न हो फ़ख्र भला,

दिल से ख़िदमत इसकी कर,

जी भर के इस पे नाज़ कर,

जिस पाकीज़ा ख़ाक से तूँ बना,

हो जा उस ख़ाक पे फ़ना,

पीरों-फ़क़ीरों की यह ज़मीं,

किस बात की इसमें कमी,

ख़ुशक़िस्मती यह तूँ अपनी मान

कि तूँ है इसकी आन-बान,

जिसने तुझे है निखारा,

उसके आसमाँ का बन सितारा,

अमन-चैन का फहरा परचम,

दुनिया के ज़ख्मों पे लगा मरहम,

अपनी सरज़मीं का रौशन नाम कर,

कुछ कारगर करना चाहे अगर!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

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6 thoughts on “अपने वतन से प्यार कर”

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