गुज़रे वक़्त को न आवाज़ दे, वो न लौट कर आएगा,
इस लम्हे का कर तस्सवुर१,इसी में सब कुछ पाएगा,
माज़ी२ तो फ़ना हो गया, वक़्त के आग़ोश में सो गया,
जो बीत गया सो बीत गया, गए लम्हों में वो खो गया,
भूल जा उसकी ख़लिश३, नयी मंज़िलों की तलाश कर,
ज़िंदगी में मायनों के रंग भरना चाहता तूँ अगर,
ज़िंदगी बस यही है जो तेरे सामने खड़ी,
न इसके कुछ आगे न पीछे, ऐसी ही है यह कड़ी,
इसका एहतराम४ कर, अपने आग़ोश में इसे ले भर,
माज़ी मुस्तक़बिल५ की कश्मकश में न इसे बर्बाद कर,
यही वक़्त है, उड़ान भर, नए आसमानों में घर बना,
कौन है जो तुम्हें रोके, कौन कर सकता मना,
इस लम्हे को पुरज़ोर जी, यूँही न घुट-घुट के मर,
सारी कायनात६ है तेरी, जी भर के तूँ इसे प्यार कर!
१.ख़्याल, ध्यान
२.बीता वक़्त
३.चुभन
४.इज़्ज़त
५.आने वाला वक़्त
६.सृष्टि
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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Nice👏👏😊😊 ❤❤
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Thank you, dear! Stay blessed.
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Nice lines sir🥀🥀
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Thank you, Sahil! Stay happy and blessed.
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