उच्च कर्मों से होगा भाग्य उदय

चल चला चल, चल चला चल,

मत सोच क्या हुआ था कल,

मत चिंता कर क्या होगा कल,

जीवन चलने का है नाम,

रुकने का नहीं कोई काम,

रुकना मरना एक बराबर,

निष्क्रियता है घोर हलाहल,

न करो तुम यह विषपान,

राह तकते नये सोपान,

नए अंबर आवाहन करते,

तुम अपने साहस का दम भरते,

कर्मठता का कवच पहनकर,

विषमताओं का भार वहन कर,

दृढ़ निश्चय को बनाओ ढाल,

नहीं होगा तुम्हारा बाँका बाल,

रणबाँकुरों की भाँति कूदो रण में,

न गति तुम्हारी छुपकर वन में,

विषम चुनौतियों को गले लगाओ,

प्रभु कृपा से विजय उनपर पाओ,

शुभ कर्मों से होगा तृप्त हृदय,

उच्च कर्मों से होगा भाग्य उदय!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

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