प्रभु को अपना खेवट बनाओ

विषय-विकारों से होकर वंचित,

अच्छाई को करके संचित,

भले मानस बन जाओ,

चिरकाल तक सुख पाओ,

विषय-विकार और राग-द्वेष,

यह सब हैं झूठे परिवेश,

कीचड़ में खिलो कमल की भाँति,

पाओ परम आनंद और शांति,

मन जिसका है निर्मल धारा,

वासनाओं से वह कभी न हारा,

निर्मल हृदय में प्रभु का वास,

भोले पंछी के वह रहते पास,

तुम भी निर्मल बन जाओ,

जीवन सफल बनाओ,

मानव जीवन है दुर्लभ हीरा,

कृष्ण की तुम बन जाओ मीरा,

खुल जाएगा मोक्ष-द्वार,

हो जाएगा बेड़ा पार,

प्रभु को अपना खेवट बनाओ,

भवसागर पार कर जाओ!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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