किसी का आस-पास होना ही बहुत है

किसी का आसपास होना ही बहुत है,

चाहे न बतियाएँ, अपनी-अपनी व्यस्तताओं में रह जाएँ,

चाहे हो जाएँ खिन्न, और एक दूसरे पर गर्माएँ,

चाहे इम्तिहान लेते-लेते एक दूसरे का उकता ही जाएँ,

पर किसी का पास होना ही बहुत है,

यह तब पता लगता है जब वह जाए कहीं दूर,

जब ख़ालीपन खड़ा हो मुँह बाएँ और रहा हो घूर,

जब लगे समय जैसे गया है ठहर,

अधिक लम्बा सा होता जाए हर पहर,

जब न दे कोई दिल के द्वार पर दस्तक,

जब लगे जैसे शून्य हो गया हो मस्तक,

तब पता लगता है किसी का पास होना ही बहुत है!

कैसा यह विधि का विधान, कैसा यह अज्ञान,

जब पास हो तो किसी के मूल्य का न हो संज्ञान,

और जब हो दूर तो लगे जैसे खो दी हो अमूल्य निधि,

लेकिन होता यह तभी है जब न जानें हम जीने की विधि,

जब जो मिल जाए लगे तुच्छ, और खो जाने पर लगे सोना,

यही तो है अज्ञानता की त्रासदी और नासमझी का रोना!

जिसने ज्ञान चक्षु खोल के हर पल और सम्बंध को है जिया,

मंगल हुआ है उसका, जीवन सुधा को उसी ने है पिया!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

14 thoughts on “किसी का आस-पास होना ही बहुत है

    1. आपके स्नेहपूर्ण प्रोत्साहन और सराहना के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, मंजुला मैडम! सब ईश्वर की कृपा है!

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  1. बहुत खूब कहा प्रोफेसर साहेब। जब तक कोई व्यक्ति या वस्तु हमारे पास है तब तक हमें उसके मूल्य का एहसास नहीं होता। यदि हमारे पास अच्छी सेहत है, तब हम उसके मूल्य को नहीं समझते। परंतु जब वही सेहत बिगढ़ती है, तब हमें अच्छी सेहत का मूल्य पता चलता है। उसी प्रकार से किसी व्यक्ति या धन के आभाव में ही उनके मूल्य का अहसास होता है। इस लिए हमें हर समय अपने रिश्तों, सेहत तथा अन्य वस्तुओं के लिए आभार प्रकट करना चाहिए और उन सबको अपने जीवन में बनाये रखने के लिए भरसक प्रयास करना चाहिए।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद, भाई! जीवन में जो वर्तमान में उपस्थित है, उसके मूल्य को वक़्त रहते समझना ही सही ज्ञान और एक सार्थक जीवन जीने का मार्ग है।

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद,मीनाक्षी जी, आपकी स्नेहिल सराहना के लिए! खुश रहिए!

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  2. बिल्कुल उचित कहा सर अपने। कोई पास न हो तो ऐसा लगता है की समय ही नहीं बीत रहा क्योंकि कोई पास ही नहीं होगा तो हम किसी बात करके समय बिताएंगे। जब कोई व्यक्ति पास न हो सिर्फ तभी उसकी मूल्यता पहचानना तो इंसान का अब स्वभाव ही बन गया है।

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