सत्य की होती असत्य पर विजय,
क्योंकि सत्य तो रहता सदा अजय,
सत्य न होता खंडित, न अविभाजित,
न होता वह कभी पस्त, न पराजित,
सत्य का तेज, सत्य की गरिमा,
बाँच न सके कोई उसकी महिमा,
सत्य तो है अविचल लोह- स्तम्भ,
पराजय का मुँह देखें असत्य और दम्भ,
जग जननी है सदा सत्य की रक्षक,
मार गिराए अन्यायी और भक्षक,
सत्य को दिव्य बल देती माँ शक्ति,
सद्कर्म से आगे न कोई भक्ति,
सत्य मार्ग पर जो निर्भय चलता,
भगवती कृपा से फूलता-फलता!
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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👌👌👌
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धन्यवाद, अंकित जी! ईश्वर की असीम कृपा आप पर बनी रहे!
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सत्य की होती असत्य पर विजय
बहुत अच्छी कविता।👌👌👌💐💐💐
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बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! खुश रहिए, आनंदित रहिए और सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहिए!
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Nice poem, sir
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Thank you very much, Saurabh dear! Good of you to say so!
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Well said sir 💯❣️
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Thank you very much, Sapna dear! Stay blessed.
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अति सुंदर विवरण सत्य का किया है, प्रोफेसर साहेब। सत्य सदा ही अमर तथा अजर है। न इसे कोई बदल सकता न ही नष्ट कर सकता है।
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बहुत बहुत धन्यवाद, भाई! सत्यमेव जयते!
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अति सुंदर कविता👌👍, सर। सत्य ही ईश्वर है 🙏
The first shloka of the Mahabharata says:
Where dharma ( truth) is, Krishna is
Where Krishna is, victory is!
Wishing u to continue creating beautiful verses, sir
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अभिव्यक्ति के छोटे-छोटे और नन्हे प्रयास हैं, मंजुला मैडम! यह आपकी बहुत अच्छाई है कि आप इन्हें सराह रही हैं! बहुत बहुत धन्यवाद!
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