सत्य तो रहता सदा अजय

सत्य की होती असत्य पर विजय,

क्योंकि सत्य तो रहता सदा अजय,

सत्य न होता खंडित, न अविभाजित,

न होता वह कभी पस्त, न पराजित,

सत्य का तेज, सत्य की गरिमा,

बाँच न सके कोई उसकी महिमा,

सत्य तो है अविचल लोह- स्तम्भ,

पराजय का मुँह देखें असत्य और दम्भ,

जग जननी है सदा सत्य की रक्षक,

मार गिराए अन्यायी और भक्षक,

सत्य को दिव्य बल देती माँ शक्ति,

सद्कर्म से आगे न कोई भक्ति,

सत्य मार्ग पर जो निर्भय चलता,

भगवती कृपा से फूलता-फलता!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

12 thoughts on “सत्य तो रहता सदा अजय

  1. सत्य की होती असत्य पर विजय
    बहुत अच्छी कविता।👌👌👌💐💐💐

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! खुश रहिए, आनंदित रहिए और सत्य के मार्ग पर अग्रसर रहिए!

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  2. अति सुंदर विवरण सत्य का किया है, प्रोफेसर साहेब। सत्य सदा ही अमर तथा अजर है। न इसे कोई बदल सकता न ही नष्ट कर सकता है।

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  3. अति सुंदर कविता👌👍, सर। सत्य ही ईश्वर है 🙏
    The first shloka of the Mahabharata says:
    Where dharma ( truth) is, Krishna is
    Where Krishna is, victory is!
    Wishing u to continue creating beautiful verses, sir

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    1. अभिव्यक्ति के छोटे-छोटे और नन्हे प्रयास हैं, मंजुला मैडम! यह आपकी बहुत अच्छाई है कि आप इन्हें सराह रही हैं! बहुत बहुत धन्यवाद!

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