हवाओं से पूछा मैंने,
कहाँ तुम रहतीं हमेशा उड़ती,
न पीछे देखतीं, न मुड़तीं,
अपने घोड़ों पे सवार,
आनंद मनातीं अपार,
नए शहरों को चूमतीं,
नए गावों में घूमतीं,
पहाड़ों के ऊपर इतरातीं,
सागर पर बल खातीं,
मरुस्थलों से जूझतीं
जबकि दुनिया तुम्हें पूजती,
न तुम्हारा कोई ठौर, न ठिकाना
आज यहाँ, तो कल कहीं और दिन बिताना,
क्यों नहीं तुम ठहरतीं,
जहां कोई बगिया हो महकती,
जहां रमणीक हो कोई स्थल,
क्यों नहीं रुकतीं वहाँ एक पल?
हंस कर बोली हवाएँ,
तुम नहीं समझते हमारा मर्म,
गतिमान रहना हमारा धर्म,
चलने में ही तो है अर्थ,
बाक़ी जानो सब व्यर्थ,
देखो, सम्पूर्ण ब्रह्मांड है चलता,
रुके का कभी कुछ नहीं है फलता,
जो रुका, कुचक्र में वह गया फँस,
मोह-माया के दलदल में वह गया धँस,
जो रुक गया, वह निम्न है भोगी,
सो सबसे उत्तम रमता योगी,
घाट-घाट का पानी पीता,
आनन्दमय जीवन वह जीता,
सारी दुनिया को वह जाने अपना,
उसका नहीं कोई संकीर्ण सपना,
व्यापक दृष्टिकोण का वह स्वामी,
उदार हृदय, विचार उसका दूरगामी,
चलने को तुम जीवन जानो,
रुकने को मृत्यु तुम मानो,
चलो, सामने व्यापक सत्य है फैला,
न रुको, न अटको, न करो चित मैला,
बढ़ जाओ नयी दिशाओं की ओर,
कल होगा नया उत्सव, होगी नयी भोर!
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul
वाह👌👌👌👌👌
बेहद खूबसूरत👍👍👍
LikeLike
आपका दिल की तह से शुक्रिया, मीनाक्षी जी! ख़ुशी हुई कि रचना आपको पसंद आयी!
LikeLike
Well said sir❣️💯
LikeLike
Thank you very much, dear! God bless you!
LikeLike
Wow! 👌👌❤️❤️
LikeLike
Thank you, Adsu! Love you!
LikeLike
Awesome Composition, sir
I’m reminded of “ Jeevan chalne ka naam” which always echoes in my mind, wheneven caught in a dilemma, motivating me to step forward.
बहुत सुंदर विषय और रचना ! 👌🏻👏🏼👏🏼👏🏼
LikeLike
Thank you very much, Manjula Ma’m! Happy if I have been able to say something worthwhile and it has touched you somewhere ! Yes, life is all about moving forward, taking each day as it comes, without any baggage.
LikeLike
👌👌👌
LikeLike
Thank you very much, Ankit dear, for your generous appreciation! Stay blessed.
LikeLike
चलने को तुम जीवन जानो ।
रुकने को मृत्यु तुम मानो।
यह सत्य और अनुकरणीय लाइन बड़ी अच्छी लगी सर। 👌👌👌🙏
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! अच्छा लगा कि आपको रचना अच्छी लगी और उसमें समाहित विचार अनुकरणीय लगा! खुश रहिए!
LikeLike
Lajawab sir❤️
LikeLike
बहुत बहुत शुक्रिया, साहिल जी, मेरी रचनाओं को पढ़ने और सराहने के लिए! खुश रहिए!
LikeLike
अति सुंदर रचना तथा एक खूबसूरत संदेश! चलना ही जीवन का सत्य है! चलने में विकास तथा पृगति है! रुका हुआ पानी तथा जीवन मृत्यु के समान हैं!
LikeLike
आपकी अति सुंदर और ज्ञानपूर्ण प्रतिक्रिया के लिए आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद, जोगेश भाई!
LikeLike