वही जाने जीवन का सार

जीवन नित नया,

बीत गया सो बीत गया,

बीती बात बिसारिए,

अब तो जीवन संवारिए,

जो आगे की ले सुध,

वही तो है प्रबुद्ध,

जो वर्तमान में जिए,

जीवन रस वह पिए,

जो आलिंगन करे हर पल का,

वही तो है नायक कल का,

जो जाने जीवन है यही एक पल,

वही चखे भाग्य का मीठा फल,

जो न भूत की गठरी ढोये,

जो बीते को न रोए,

वह जागृत है, नहीं है सुप्त,

वह स्वछंद है, वही है मुक्त,

वही जाने जीवन का सार,

उसके लिए खुले मुक्ति द्वार!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

12 thoughts on “वही जाने जीवन का सार

  1. ‘जीवन नित नया’ कविता अच्छी लगी।🙏🙏🙏💐💐

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद, ममता मैडम! हर पल को अच्छे से जिएँ और खुश रहें, संतुष्ट रहें!

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  2. Outstanding composition, sir. Profound thinking, simple words! 👍🏼Keep writing and making impact👏🏼👏🏼

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