यही तो है वह युक्ति

प्रेम की हम अलख जगाएँ,

सह-मानव को गले लगाएँ,

सरल भाव से जीवन जिएँ,

सत्य-सुधा का रस पिएँ,

श्रेष्ठता की हर सीढ़ी चढ़ें,

न्याय मार्ग पर सतत बढ़ें,

पर सेवा को बनाएँ धर्म,

शुद्ध होंगे हमारे कर्म,

सोच बड़ी हो, सबल आत्मा,

तभी मिलेंगे परमात्मा,

तभी गा पाएँगे मुक्ति-गान,

तभी मिलेगा मोक्ष-दान,

यही तो है वह युक्ति

जीवन रहते दिलाए मुक्ति!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

8 thoughts on “यही तो है वह युक्ति

  1. मानवता की सेवा ही परमात्मा की सच्ची सेवा है।🙏🙏
    जीवन जीने की कला सिखाती, बहुत सुंदर कविता👌👌

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    1. धन्यवाद, मीनाक्षी जी! जीने की कला सीखना ही तो सबसे बड़ी चुनौती है!

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  2. पर सेवा को बनाएं धर्म।
    बहुत अच्छी कविता है सर।💐💐💐🙏🙏🙏🙏

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! आप जैसे हिंदी के विवेकशील प्राध्यापक जब मेरी हिंदी रचना का अनुमोदन कर देते हैं तो मुझे और भी अच्छा लगता है!

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