प्रेम की हम अलख जगाएँ,
सह-मानव को गले लगाएँ,
सरल भाव से जीवन जिएँ,
सत्य-सुधा का रस पिएँ,
श्रेष्ठता की हर सीढ़ी चढ़ें,
न्याय मार्ग पर सतत बढ़ें,
पर सेवा को बनाएँ धर्म,
शुद्ध होंगे हमारे कर्म,
सोच बड़ी हो, सबल आत्मा,
तभी मिलेंगे परमात्मा,
तभी गा पाएँगे मुक्ति-गान,
तभी मिलेगा मोक्ष-दान,
यही तो है वह युक्ति
जीवन रहते दिलाए मुक्ति!
अरुण भगत
#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry#poetryofthesoul
Nice lines sir ❣️
LikeLike
Thank you, dear! Stay blessed.
LikeLike
मानवता की सेवा ही परमात्मा की सच्ची सेवा है।🙏🙏
जीवन जीने की कला सिखाती, बहुत सुंदर कविता👌👌
LikeLike
धन्यवाद, मीनाक्षी जी! जीने की कला सीखना ही तो सबसे बड़ी चुनौती है!
LikeLike
Nice sir❤️
LikeLike
धन्यवाद, प्रिय साहिल! खुश रहो!
LikeLike
पर सेवा को बनाएं धर्म।
बहुत अच्छी कविता है सर।💐💐💐🙏🙏🙏🙏
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! आप जैसे हिंदी के विवेकशील प्राध्यापक जब मेरी हिंदी रचना का अनुमोदन कर देते हैं तो मुझे और भी अच्छा लगता है!
LikeLike