अजीब सी यह एक पहेली है

ज़िंदगी की क्या ग़ज़ब कहानी है,

कभी सब कुछ जाता थम, कभी लगे रगों में रवानी है,

अजीब सी यह एक पहेली है,

कभी दुश्मन, कभी लगे सहेली है,

कभी बैठाए सिर पर, कभी नीचे पटकती है,

कभी सजे काजल की तरह आँखों में, कभी कंकड़ की तरह अटकती है,

कभी लहलहाते खेतों की तरह, कभी लगे भूमि बंजर,

कभी लगाए मरहम, कभी चुभे जैसे ख़ंजर,

कभी बांधे अपने मोहपाश में, कभी करे मोहभंग,

कभी लगे बेरंग, कभी बिखेरे सुंदर मनमोहक रंग,

ज़िंदगी की बिसात में लगी रहती जीत हार,

कभी छोड़ दे बीच भँवर में, कभी लगाए पार,

कौन इसके मर्म को जान पाया है,

कभी लगे हक़ीक़त, कभी तिलिस्मी साया है,

कौन लगाए हिसाब क्या खोया, क्या पाया है,

राम जी ही जानें यह क्या उनकी अदभुत माया है!

अरुण भगत

#arunbhagatwrites #poetry #poeticoutpourings #outpouringsofmyheart #writer #indianwriter #englishpoetry #poetryofthesoul

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

10 thoughts on “अजीब सी यह एक पहेली है

Leave a comment

Design a site like this with WordPress.com
Get started