यही है ज़िंदगी की कहानी अजब

ज़िंदगी का अजब सा ताना बाना,

इसका मतलब कौन है जाना?

कहाँ ख़त्म होते इसके रास्ते,

हम जीते किस शह के वास्ते?

कहाँ जा के रुकता हमारा कारवाँ,

कौन है हम सब का बाग़बान?

किसके हाथ में है हमारी डोर

जिस पे चलता न कोई हमारा ज़ोर?

कौन है जो हमें नाच है नचाता,

कौन है चाँद और सितारों पे भी हुक़ूमत है चलाता?

कौन है जिसकी हमारे रगों में है रवानी,

कौन है जिसके नाम पे लिखी हम सब की ज़िंदगानी?

कौन है जो हमें हँसाता और रुलाता,

कौन है जो हमें मीठी नींद है सुलाता,

कौन है जो हमारे सपनों के ताने बाने है बुनता,

कौन है जो हमारी फ़रियादों को है सुनता,

कौन है जो फिर हमें इक दिन अपने आग़ोश में है ले लेता,

और ज़िंदगी की हर अज़िय्यत से छुटकारा है देता?

फिर आज़ाद हो शायद हम उड़ चलते अपने वतन की ओर,

जिसका इस जहाँ में न पाया कभी किसी ने छोर!

यही है ज़िंदगी की कहानी अजब,

जिसको लिखने वाले ने लिखा है क्या ग़ज़ब!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

13 thoughts on “यही है ज़िंदगी की कहानी अजब”

  1. बहुत खूब प्रोफेसर साहब! जीवन यकीनन एक बड़ा रहस्य है! पूरे संसार को चालाने वाला कौन है, यह इससे भी बड़ा रहस्य है! हमारा पूरा जन्म भी काफी नहीं है इन रहस्यों की समझने के लिए।

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    1. आपके प्रोत्साहन और आपकी टिप्पणी के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, भाई! ज़िंदगी कैसी है पहेली हाय, कभी यह रुलाए, कभी यह हंसाए! ऐसा ही है जीवन!

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