समय की धारा में बहता है जो

जो बीत गया सो बीत गया,

अब उससे लेना देना क्या?

जो गुज़र गए दिन और रातें,

क्यों करता है आज उन की बातें?

छुट गए हैं सदा के लिए पीछे जो रास्ते,

क्यों भरता है आहें उनके वास्ते?

जिस पथ पर अब खड़ा, उस पर अपनी नज़र गढ़ा,

इस पल से, याद रख, कुछ भी नहीं है बड़ा,

इस पल में ही है सारा जीवन समाया,

जिसने इसे निःसंकोच है गले लगाया,

उसने इस सागर से चुने हैं नायाब मोती,

ऐसे इंसान की क़िस्मत कभी न सोती,

बीती बातों का न वह कभी बोझ ढोता,

आगे की व्यर्थ चिंताओं को ले न अपना संतुलन खोता,

वर्तमान पल को दे देता वह अपना सर्वस्व,

उसी में ढूँढता और पाता वह अपना वर्चस्व,

समय की धारा में बहता है जो रमता योगी,

जीवन उसी का है सार्थक, जय उसी की होगी!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

14 thoughts on “समय की धारा में बहता है जो”

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, रचना जी! ज़िंदगी जीने का सही तरीक़ा आ जाए तो क्या बात है!

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  1. Well said Professor Saheb. Flowing with the life is key to happiness and success. No point brooding over the past or worrying about the future. Live to your fullest in the now and flow with times.

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