इस पल में है जीवन का वास

इस पल से बंधी हमारी आस,

इस पल में ही है जीवन का वास,

यही पल तो है जो हमारा है,

इसे गँवाना नहीं हमें गवारा है,

इस पल से बंधी है जीवन की डोर,

किसने देखी है कल की भोर ?

इस पल में बसती है हमारी जान,

यही पल है हमारे जीवन की खान,

यही पल है हमारे जीवन की लौ,

किसी क़ीमत पर न दें हम इस को खो!

इस पल में ही है धरा सब कुछ,

इस के आगे है सब कुछ तुच्छ,

यही पल कर सकता है हमारे सपने साकार,

यही दे सकता है जीवन को हमारे इच्छित आकार,

इससे पहले कि मौत ले हमें अपनी चादर में लपेट,

इस पल को आओ अपनी बाहों में लें समेट,

जी लें इसे शिद्दत से अपनी आँखों में भर,

ताकि जब आख़िरी वक़्त आए तो न कोई हसरत हो न डर!

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

20 thoughts on “इस पल में है जीवन का वास

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! हर्ष का विषय है कि कविता आपको सुंदर लगी! खुश रहिए!

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  1. बहुत ही अच्छी कविता है सर। इस पल को हमें आनंदपूर्वक जी लेना चाहिए। क्या पता ये खुशी के पल हो या न हों। आज और अभी के जो पल हैं उसमें ही सब कुछ है।

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  2. Well said Professor Saheb. We can’t live in the past as it is gone and dead. We can’t live in the future as it is uncertain whether we will be alive. Only the current moment is certain. So one must seize the current moment and live it to the fullest That’s the only way to live a meaningful life.

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