फ़िज़ाओं में घुलता ज़हर कुछ बोल रहा है,
रिश्तों का घुटता दम कुछ बोल रहा है,
क़हर बरपाया है जिस कुदरत पे वह बहुत कुछ सह रही है,
इंसान की इंसान से बेज़ारी बहुत कुछ कह रही है!
मरते हुए एहसास भी कुछ बोल रहे हैं,
डरे हुए अल्फ़ाज़ भी कोई गिरह खोल रहे हैं!
दबी हुई सिसकियों का शोर है काफ़ी,
कह रहा है शायद हमारे गुनाहों की है कोई है नहीं माफ़ी!
ज़र्रा ज़र्रे से माँग रहा है उसके किए का हिसाब,
कोई तो है ऊपर जो लिख रहा है यह गमगीन किताब!
कहाँ खतम होगी यह अंधी दौड़?
ग़र्क़ करके ही छोड़ेगी शायद यह ग़ैर इंसानी होड़!
किस से करें फ़रियाद, किस से माँगें पनाह,
कौन है जो बख्शेगा हमारे बेशुमार गुनाह?
कौन है जो हमारी दफ़्न इंसानियत को जिलाएगा,
कौन है जो हमें फिर इक बार ज़ेहानत की घुट्टी पिलाएगा?
कौन है जो ईसा की तरह सूली पे चढ़ जाएगा,
कौन है जो रूहानी क़द्रों के लिए मौत से भी लड़ जाएगा,
शायद वो मसीहा कोई और नहीं, हम खुद ही हैं,
अपनी कश्ती को पार लगाने वाले बुद्ध हम खुद ही हैं!
चलो खुदी को करें बुलंद इतना
कि ज़िंदगी सच में जन्नत बने, न रह जाए यह महज़ सपना!
अरुण भगत
#arunbhagatwrites #poetry #poeticoutpourings #outpouringsofmyheart #writer #indianwriter #englishpoetry #poetryofthesoul
Awsome 😍❤️
LikeLike
Thank you very much, Sahil dear! Grateful to God that I am able to connect with you through what I write! Stay blessed.
LikeLike
Sir, Your every poem is thought provoking. Superb poem.
Regards
SNEHLATA
LikeLike
Thank you very much, Snehlata Ji! If we can say or write something thought-provoking, it is a privilege, isn’t it? And in these privileges of ours lies God’s grace.
LikeLike
Awesome poem Sir!!!!
LikeLike
Thanks a ton, Neha Ji! Grateful to you for all this appreciation!
LikeLike
The pain he/she have outside is better then pain you have inside, because the pain he/she is having will create losts of trouble for a person emotionally, mentally and physically too!!
Well said sir🌸❤
LikeLike
Thank you, Sapna dear, for your word of appreciation as well as your observations! Stay blessed.
LikeLike
वाकई बहुत सुंदर लाइन है यह “शायद वह मसीहा कोई और नहीं खुद हम ही हैं”
बहुत-बहुत धन्यवाद सर, 🙏💐
LikeLike
धन्यवाद, ममता जी! इस एक पंक्ति में एक पूर्ण जीवन दर्शन है!
LikeLike
Bahuut sunder Kavita hai sir ,
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, रचना जी, कि आपने कविता को सराहा! अच्छा लगा कि आपको लिखा अच्छा लगा!
LikeLike
बहुत ही सुंदर लिखा है सर आपने। कुदरत के साथ जो गलत हुआ है उसका हमें भुगतना ही पड़ेगा और ऐसे हालातों में मसीहा भी हमें ही बनना पड़ेगा।
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, राशि! आपने कविता का भाव बहुत अच्छे से समझा है! यह आपकी सूझ बूझ का परिचायक है!
LikeLike
Very nice sir..
LikeLike
Thank you very much, Priya dear! God bless you!
LikeLike