जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति

जो जीता वही सिकंदर,

जो हारे न उसके कुछ पल्ले, न उसके अंदर!

जीतने वाले का जादू सिर चढ़ कर बोले,

हारने वाले का तो जैसे सूरज ही अस्त हो जाए हौले हौले!

जीतने वाले का सब लोहा मानें,

हारने वाले को कौन है जाने?

जीतने वाले का तो झूठ भी सच माना जाए,

हारने वाले का सच भी किसी को फूटी आँख न सुहाए!

जीतने वाले की है यह दुनिया सारी,

हारने वाले की तो मानो सिमट गयी है पारी!

जीतने वाले के लिए तो उपलब्ध है हर सुविधा,

हारने वाले के हिस्से तो केवल दुविधा ही दुविधा!

इसीलिए हर कोई जीतना चाहता है हर दम,

हारने वाले के दामन में तो रह जाते हैं केवल भर्त्सना, उपेक्षा और ग़म!

इसीलिए जीतना ही रह गया है सब का अंतिम गंतव्य,

जीत कैसे भी हासिल हो, यही सब का मूल मंत्र, यही सब का मंतव्य!

जीतने की इस अंधी दौढ़ में हो रहा जीवन मूल्यों का तीव्र पतन,

क्या हो पाएगा फिर एक स्वस्थ समाज का निर्माण, चाहे कितने भी कर लें यतन?

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

17 thoughts on “जो जीता वही सिकंदर–एक भ्रम आसक्ति

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, सपना जी! श्रेष्ठ जीवन जियो और किसी भी क़ीमत पर जीत हासिल करने के भ्रम के पीछे मत भागो!

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    1. You have aptly quoted Bill Gates, Sister. When we want to win and win and win at
      any cost, we lose, our humanity loses and the society at large is a loser! Thanks for responding!

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  1. At every stage of life, winning is emphasized and encouraged. It is seldom told that means are as important as the ends. Very well put, Professor Saheb.

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  2. At every stage of life, winning is emphasized and encouraged. It is seldom told that means are as important as the ends. Well said, Professor Saheb.

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  3. बिल्कुल सही सर । चाहे हारने वाला कितने भी पर्यतन कर ले परंतु सिर्फ जीत ही देखी जाती है बल्कि सच्चाई तो यह है कि हारने वाला ही बहुत कुछ सीख जाता है और जो हर दम जीत ता है उसमे अहम आ जाता है ।

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    1. बिलकुल सही, राशी! आपने जीतने और हारने वाले दोनो के लिए बिलकुल सही बात कही है! बहुत अच्छे!

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