हर किसी से प्यार कर,
न अस्मतों पे वार कर,
हर किसी को दे सहारा,
ख़ुदगर्ज़ी हो न तुझे गवारा !
ख़ुदा की रहमत सब के लिए माँग,
न किसी को बेवजह सूली पे टांग,
तेरी वजह से हो सबका मेल,
नफ़रतों का ख़ौफ़नाक खेल तूँ कभी न खेल,
सारी कायनात से तूँ प्यार कर,
उस प्यार का जी भर इज़हार कर,
न किसी को समझ अपने से जुदा,
हर एक में बसता है वही एक ख़ुदा!
रख हर क़ीमत पर अपने ज़मीर को ज़िंदा,
बिन ज़मीर इंसान जैसे पर कटा परिंदा!
क़ायम रहेगा ग़र तूँ इंसानी कदरों पे,
वो दो जहां का मालिक नवाज़ेगा तुझे अपनी रहमतों से!
उस रहमत का तूँ इस्तक़बाल कर,
न हो बेज़ार तूँ, अपने अख़लाक़ पे मान कर!
ज़माने की कशिश कर देगी तुझे रेशा रेशा,
दोनों हाथ से बटोरने को न बना अपना पेशा,
अपने अंदर की खुदाई का तूँ एहतराम कर,
दोनों हाथों से दे तूँ, हर किसी को प्यार कर!
अरुण भगत
Jai ho
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शुक्रिया, शिवम्! खुश रहिए!
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❤️❤️
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धन्यवाद, आडसु, आपके स्नेह के लिए!
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👏👏👏 bemisaal likhte h aap sir..
Insaan ko khudke liye nhi sabke bhale k liye kaam krne chahiye…
Har kisi se pyaar krna chahiye ☺️
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बहुत बहुत धन्यवाद, अर्चित, आपकी सराहना और अच्छी टिप्पणी के लिए! खुश रहिए हमेशा!
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Lajawab👌👌
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बहुत बहुत धन्यवाद, साहिल! ख़ुशी हुई आपको कविता अच्छी लगी!
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Beautiful words,awesome poetry & marvelous style of writing!!!!
Bahut khoob!!!!
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Thank you very much, Neha Ji! Since you are indulgent towards me, you always make it sound more awesome than it perhaps actually is. Thanks nevertheless for all your affection and encouragement!
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Beautiful words,awesome poetry & marvelous style of writing!!!!
Bahut khoob!!!!
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Thank you, Sapna dear! Stay blessed.
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Beautiful poem, sir!
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Thanks a lot, Vijay Laxmi! Grateful for all your appreciation!
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True lines by a true poet…
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Thanks a lot, Sonia Ma’m! You are indeed very kind!
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Bahot sunder..
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बहुत बहुत धन्यवाद, प्रिया जी! ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे!
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