हर किसी से प्यार कर

हर किसी से प्यार कर,

न अस्मतों पे वार कर,

हर किसी को दे सहारा,

ख़ुदगर्ज़ी हो न तुझे गवारा !

ख़ुदा की रहमत सब के लिए माँग,

न किसी को बेवजह सूली पे टांग,

तेरी वजह से हो सबका मेल,

नफ़रतों का ख़ौफ़नाक खेल तूँ कभी न खेल,

सारी कायनात से तूँ प्यार कर,

उस प्यार का जी भर इज़हार कर,

न किसी को समझ अपने से जुदा,

हर एक में बसता है वही एक ख़ुदा!

रख हर क़ीमत पर अपने ज़मीर को ज़िंदा,

बिन ज़मीर इंसान जैसे पर कटा परिंदा!

क़ायम रहेगा ग़र तूँ इंसानी कदरों पे,

वो दो जहां का मालिक नवाज़ेगा तुझे अपनी रहमतों से!

उस रहमत का तूँ इस्तक़बाल कर,

न हो बेज़ार तूँ, अपने अख़लाक़ पे मान कर!

ज़माने की कशिश कर देगी तुझे रेशा रेशा,

दोनों हाथ से बटोरने को न बना अपना पेशा,

अपने अंदर की खुदाई का तूँ एहतराम कर,

दोनों हाथों से दे तूँ, हर किसी को प्यार कर!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

18 thoughts on “हर किसी से प्यार कर”

  1. 👏👏👏 bemisaal likhte h aap sir..
    Insaan ko khudke liye nhi sabke bhale k liye kaam krne chahiye…
    Har kisi se pyaar krna chahiye ☺️

    Like

    1. बहुत बहुत धन्यवाद, अर्चित, आपकी सराहना और अच्छी टिप्पणी के लिए! खुश रहिए हमेशा!

      Like

    1. Thank you very much, Neha Ji! Since you are indulgent towards me, you always make it sound more awesome than it perhaps actually is. Thanks nevertheless for all your affection and encouragement!

      Like

Leave a Reply

Create your own website, free on WordPress.com.Create your own website.
Start free