ज़िंदगी का मसला भी बड़ा अजीब है,
कोई पास हो कर भी दूर, कोई दूर हो कर भी क़रीब है!
कोई बहुत सोच कर मुँह है खोलता,
कोई अपने शब्दों को ही नहीं तोलता!
कोई दूसरों के लिए जान की लगा दे बाज़ी,
तो कोई किसी के लिए कुछ करने को नहीं राज़ी!
किसी में कुछ कर मिटने का है जनून,
किसी को कुछ न करने में सकूँ!
कोई पोथी पढ़ पढ़ भी अनजान,
कोई बिना पढ़े भी परम विद्वान!
कोई सारे जग को अपना है मानता,
कोई संग रहने वाले को भी न जानता!
कोई अनुभूत करे परम तत्व को चहूं ओर,
कोई प्रभु को न देख पाए किसी ठौर!
कोई कंगाली में भी स्वयं को माने परम धनवान,
कोई धन के ढेर पर बैठा भी अतृप्त नादान!
कोई हर हाल में चैन की बंसी है बजाता,
कोई हर किसी को अपनी बेचैनी की गाथा है सुनाता!,
कोई सत्य की राह पर सतत आगे बढ़ता जाए,
कोई असत्य को ही सत्य मान खुद को भरमाए!
यही जीवन की लीला, यही जीवन का खेल,
भाँत भाँत के लोगों का होता है यहाँ मेल!
सब के भाग्य लिखता है विधाता पकड़ कर अपनी तूलिका,
जीवन के रंग मंच पर हर कोई निभाता अपनी भूमिका,
अपने पात्र को जी हर कोई विदा होता इस जहां से,
जहां से आया था, चला जाता है वहीं यहाँ से,
लेकिन कहाँ से आया था, कहाँ हो जाता है लुप्त,
इस रहस्य को कोई न जाने, प्रकृति का यह सत्य है गुप्त!
अरुण भगत
Wah sir
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धन्यवाद, छविल! जीते रहिए!
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Bilkul sahi baat hai sir.
Aur bahot hi sunder likha h..!!!
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धन्यवाद, प्रिया, आपकी सबल प्रेरणा के लिए! खुश रहिए!
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💕😍
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धन्यवाद, साहिल!
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True lines sir👌🌸🤞🥰❤
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धन्यवाद, सपना! जीवन सत्य सहज स्वीकार्य होना चाहिए!
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Very well said, sir!
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धन्यवाद, विजय लक्ष्मी! आप कहती हैं तो ठीक ही लिखा होगा! सब ईश्वर की कृपा है!
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Bahut khoob Sir!!!!
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I thank you from the bottom of my heart, Neha Ji! Stay happy.
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उत्कृष्ट रचना👌🙌सर!!
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बहुत बहुत धन्यवाद, श्वेता जी! रचना आपको इसलिए उत्कृष्ट लगी क्योंकि आपके अपने विचार उत्कृष्ट हैं!
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