मैंने मोबाइल पर लिखी एक कविता
जैसे बहा दी हो शब्द सरिता,
उसके पीछे था विचारों का एक रेला,
और गहरी भावनाओं का पूरा मेला!
प्रौद्योगिकी से ज़्यादा हैं नहीं वाक़िफ़,
हमें वह ज़्यादा बैठती भी नहीं माफ़िक़,
अंजाम यह कि डिलीट दब गया
और जो लिखा था वह सब का सब गया!
लिखा जब यूँ मिट गया तो दिल रह गया धक
और चेहरा पड़ गया फक,
अपने को सम्हाला और सोचा जब ख़ुद ही मिट जाना है एक दिन,
तो फिर रह सकते हैं मिटी कविता के भी बिन!
लेकिन खुद को समझाने से पहले का दुःख ऐसा एहसास जगा गया
जैसे किसी माँ बाप के हाथों से उनका बच्चा चला गया!
उस परम दुःख को समझता तो था मैं पहले भी,
लेकिन अब लगा जैसे वह हो गया मेरा ही!
घर के एक जानकार बच्चे से पूछा अगले दिन,
लड़ाओ कोई जुगत कि कविता वापिस आ जाए,
वह बोला कि रहना पड़ेगा अब उसके बिन,
जो खो गया समय की गर्त में वह कब वापिस है आ पाए?
मैंने भी सोचा जब बड़े बड़े महारथी समय की भेंट चढ़ गए,
तो एक छोटी सी कविता की कोई क्या कहे?
यह टीस तो शायद कुछ देर जाएगी नहीं,
लेकिन निश्चित है कविता भी वापिस आएगी नहीं!
ढीठ बनना पड़ता है ज़िंदगी जीने के लिए,
तैयार रहना पड़ता है विष के घूँट पीने के लिए!
किसी और वजह से भी आज मन भारी है,
पर खेलनी तो पड़ेगी जो ज़िंदगी की पारी है,
इसलिए लिखने बैठा हूँ फिर आज,
कहाँ रुकते हैं जीवन के काम काज?
खोई कविता में से निकली है एक और कविता,
मानो लुप्त सरिता में से निकली हो एक और सरिता!
यह भी सोचा कि उस कविता को दुबारा लिखूँ
तो मैं भी शायद कुछ बुद्धिमान दिखूँ,
फिर समझ आया कि जो समय के गर्भ में खो गया,
उसका तो अंतिम संस्कार हो गया!
जाने वाला कभी वापिस न आए,
वक़्त की रेत पर उसके कदमों के निशान भी न कोई पाए!
चलो नयी कविता लिख सिलसिला बढ़ाएँ आगे,
यूँ ही आगे आगे समय है भागे !
अरुण भगत
Awesome lines sir❤🌸
I am impressed with your poetry 😌😌😌😌
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धन्यवाद, सपना! आपके प्रेम और स्नेह के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!
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बहुत ही सुंदर कविता गुरु जी
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शानदार कविता सर जी
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धन्यवाद, छविल, आपकी जानदार और शानदार टिप्पणी के लिए! खुश रहिए!
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Wow! This poem has touched my heart.
superb Sir💥👌👌👌
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Very beautifully expressed loss
Also very optimistic
Provides wonderful lesson of life
Wonderful verse
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Thank you very much, Sarika Ji! Good to see a discerning person like you responding so warmly to the poem! God bless you!
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Thank you very much, Adsu! Your warm and lovely response has touched my heart as well! Stay blessed.
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कविता के यूँ खो जाने का दर्द एक कवि बखूबी समझ सकता है।
बेहद बेहतरीन रचना है Sir
👌👌👌👌👌👌
इस रचना के माध्यम से आपने ये भी समझाने की कोशिश की है कि जो समय और जो अपने चले जाते हैं, वो कभी लौटकर नहीं आते, औऱ हमें जीवन मे आगे बढ़ते रहना चाहिए।
बेहद सटीक और सार्थक रचना👏👏👏👏
👌👌👌👌👌👌
🙏🙏🙏🙏🙏
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बहुत बहुत धन्यवाद, मीनाक्षी जी! सब ईश्वर की असीम कृपा और आप जैसे सुलझे हुए और भावनाओं से ओत प्रोत पाठकों की प्रेरणा है!
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वाह प्रोफेसर साहेब, अति सुंदर। आपने अपने जीवन के अनुभव को कितनी कुशलता से जीवन के कटु सत्य से जोड़ा है।
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धन्यवाद, मेरे प्रिय भाई! साहित्य कहीं न कहीं जीवन सत्य से ही तो प्रेरित होता है।
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यहीं जीवन का सच है सर जी । जो बीत गया उसको भूलकर आगे बढ़ ना ही जीवन है । जीवन एक कविता ही है। बहुत सुंदर शब्दो में आपने लिखा है। ऐसे ही सुंदर लिखते रहे आप।
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आपकी प्रशंसा और प्रेरणा के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद, अजय जी! ब्लॉग में आपको टिप्पणी करते देख अच्छा लगा!
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quite commendable sir 😊❤️❤️
Quite a wonderful poem.
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Thank you very much, Bhola dear! Your warm response is equally commendable! Stay blessed.
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Wow! wonderful and commendable poem sir.
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Thank you, Vijay Laxmi! I will be really happy if you comment on a Hindi poem in Hindi itself!
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हमारी पीढ़ी के मर्म और जीवन सत्य को परिभाषित करती अनुपम रचना
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बहुत बहुत धन्यवाद, किरण जी! कविता वही जो मर्म को जाने और उसकी यथोचित अभिव्यक्ति भी करे! खुश रहिए!
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बहुत ही शानदार👌🙌✍️सर!
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आपका बहुत बहुत धन्यवाद, श्वेता जी! ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे!
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Respected Sir. Very best poem…Theam….Nature rule one come here naturally he will go or end of the life.We must prepare for it.
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धन्यवाद, डॉक्टर प्रवीण! आप जैसे हिंदी के प्राध्यापक और प्रबुद्ध महानुभाव को कविता अच्छी लगी, यह मेरा सौभाग्य है! खुश रहिए!
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