मौन

मौन में है छुपा बहुत कुछ,

क्या, यह पूछ के तूँ बन न तुच्छ!

मौन से उपजा यह संसार,

मौन में है प्रभु की कृपा अपार!

मौन बहुत कुछ बोलता,

अनेक गाँठें है खोलता!

मौन सत्य से जोड़ता,

बहुत से भ्रम है तोड़ता!

मौन से मिलता परम ज्ञान,

मौन से ही होता है ध्यान!

मौन में छिपी परम शांति,

मौन से दूर होती हर भ्रांति!

मौन ही ब्रह्माण्ड में व्याप्त,

मौन से होती ज्ञान मणि प्राप्त!

मौन से खुलते सब रस्ते,

मौन में ईश्वर हैं बसते!

कोलाहल की ओर न जाइए,

मौन में सब कुछ पाइए!

जितना ज्ञानी, उतना मौन,

यह हमें समझाए कौन?

अरुण भगत

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

14 thoughts on “मौन

    1. मौन का वास्तव में जीवन में बहुत महत्व है , नेहा जी ! इसे समझने की आवश्यकता है!

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    1. धन्यवाद, सोनिया जी! अच्छा होगा अगर हम सब मौन के महत्व को आत्मसात् करें!

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  1. Silence is the best remedy…scintillating element prevalent in each soul…beyond perfection…written beautifully

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  2. बहुत बढ़िया कविता है सर। मौन का हमारे जीवन में बहुत महत्व है।

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