अमृत हैं बारिश की बूँदें

अमृत हैं बारिश की बूँदें,

मज़ा लो इनका आँखें मूँदे!

वर्षा की शीतल फुहार,

जैसे माँ का दुलार!

रिमझिम बरसता सावन

लगे कितना मनभावन!

तपती धरती को करता तृप्त,

जैसे उसके प्रेम में हो वह लिप्त!

मौज में मेढक टर्राते,

सब हैं झूमते और हैं गाते !

जल से यूँ भर जाते नदियाँ झरने,

जैसे जी जाए कोई जो चला हो मरने!

जी उठती वनस्पति, लहलहाते खेत,

सब मिल कर आनंद हैं लेत!

सावन का रोमांच है अपना,

जैसे सुंदर मीठा सपना!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

26 thoughts on “अमृत हैं बारिश की बूँदें”

  1. बहुत ही सुंदर प्रकृति चित्रण है इस कविता में
    धन्यवाद सर।💐🙏

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    1. धन्यवाद, ममता मैडम! जो भी चित्रण मैं कर पाया हूँ सब ईश्वर की कृपा है!

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  2. बहुत ही सुंदर प्रकृति चित्रण है इस कविता में
    धन्यवाद सर।💐🙏

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  3. अति सुंदर विवरण! हर प्राणी के जीवन में सावन के महत्त्व का अति सुंदर चित्रण।

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    1. धन्यवाद, प्यारे भाई! सावन ऋतु है ही सुंदर तो उसका सुंदर चित्रण तो होना चाहिए!

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