अल्लाह जाने, मौला जाने,
सब कुछ है वो जाने!
सब को अपनी दात वो देता,
किसी से कुछ वो न लेता,
कोई माने या न माने!
सब पर अपनी रहमत बरसाता,
सब को अपनी ज़ुबाँ में समझाता,
कोई जाने या न जाने!
पूरी कायनात में वो बसता,
ज़र्रे ज़र्रे में वो जँचता,
कोई माने या न माने!
सब ओर उसका नूर है फैला,
कभी न होता है वो मैला,
कोई जाने या न जाने !
बंजर को वो कर दे हरा,
मिटा देता वो हर ज़रा,
कोई माने या न माने!
अगर दिल को कर लें साफ़,
हम सब को वो करता माफ़,
कोई जाने या न जाने!
मुझ में रहता, तुझ में रहता,
ज़मीर के ज़रिए सब कुछ कहता,
कोई माने या न माने!
अरुण भगत
Bhot sunder sir..🙏
LikeLike
धन्यवाद. प्रिया! आपकी सुंदर प्रतिक्रिया के लिए आभार!
LikeLike
Well said sir👌😇
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, सपना जी! खुश रहिए!
LikeLike
बहुत ही सुन्दर रचना गुरु जी
LikeLike
बहुत बहुत शुक्रिया, छविल ! ईश्वर की कृपा आप पर बनी रहे!
LikeLike
अति उत्तम गुरु जी
LikeLike
Perfect sir 🙏🏻🙏🏻
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, नरेंद्र जी! अच्छा लगा कि कविता आपको पसंद आयी!
LikeLike
बहुत ही सुन्दर सर!
LikeLike
बहुत बहुत शुक्रिया! खुश रहिए और ऊपर वाले की रज़ा में रहिए!
LikeLike
Very beautiful poem sir!
LikeLike
धन्यवाद, विजय लक्ष्मी, और बहुत बहुत प्यार एक लेखक की ओर से अपनी बहुत अच्छी पाठिका को!
LikeLike
Amazing lines!!!!
Superb Sir!
LikeLike
धन्यवाद, नेहा जी! आपका स्नेह हमेशा मिला है ईश्वर की कृपा से! खुश रहिए हमेशा!
LikeLike
Very beautiful poem sir
Keep it up!
LikeLike
धन्यवाद, रचना जी, आपके स्नेह और प्रोत्साहन के लिए! मैं आपका ऋणी हूँ!
LikeLike
बिल्कुल सही सर । भगवान तो हर चीज़ में बसे हुए हैं बस उन्हें देखने का तरीका सबका अलग – अलग है।
LikeLike
बिलकुल सही कहा आपने, राशी! ईश्वर सर्वत्र हैं, बात महसूस करने की है!
LikeLike
Beautifully written 💐💐
LikeLike
Thank you, Ankita Ma’m! Stay blessed.
LikeLike
मुझ में तुझ में समाया है वही
मुस्कानों में भी बयाँ है वही
उत्तम वचन अरुण जी
LikeLike
बहुत बहुत धन्यवाद, सुनीता जी! अल्लाह की रज़ा में खुश रहिए!
LikeLike
अरूण भाई के भक्ति भाव को नमन । 🙏
LikeLike
उस भाव को सराहने के लिए आपको भी नमन, भाई!
LikeLike