ख़ूबसूरत रिश्तों को नज़र

उमदा और ख़ूबसूरत रिश्तों की बात ही कुछ और होती है!

वे होते हैं सर्दी की पीली धूप में खिले ख़ुशनुमा फूलों की तरह,

वे होते हैं ताज़ी मीठी हवाओं के लहराते झोंकों की तरह,

वे चमकते हैं जाढ़े की नम ओस के मोतियों की तरह,

वे होते हैं एक मासूम बच्चे की बेबाक़ खिखिलाती हँसी की तरह,

वे होते हैं नर्म गुदगुदाते एहसासों की मानिंद,

वे होते हैं सुंदर सावन में पंख फैला नाचते मोर की तरह,

वे पुलकित करते हैं सुबह के एक रोमांचक सपने की तरह,

वे होते हैं बेशक़ीमती अनमोल हीरों सरीखे,

वे होते हैं दिल में उठने वाली एक मीठी हूक की तरह।

वे होते हैं हमें अपनी जाँ से भी ज़्यादा प्यारे,

वे सच में होतें हैं इस दुनिया में सबसे न्यारे,

और बेशक उनसे ही होते हैं हमारे वारे न्यारे।

वही करते सही मायनों में हमें मालामाल,

वही रखते सच में हमें ज़िंदा सालों साल!

वो ही देते हैं हमारी ज़िंदगी को मायने,

उनके सिवा दिखाए कौन हमें आइने?

वही देते हैं हमारी ज़िंदगी को नए आयाम,

बस यही है हमारा उनके लिए प्यार भरा पैग़ाम!

अरुण भगत

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

14 thoughts on “ख़ूबसूरत रिश्तों को नज़र”

  1. बहुत ही उम्दा कविता है सर । हमारी जिंदगी में हर रिश्ते के अलग माइने हैं उन रिश्तों के बगैर हम कुछ भी नहीं। वही हमें बहुत खुशी देते हैं और दुख के समय में हमारा साथ भी देते हैं।

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    1. बिलकुल सही फ़रमाया है आपने, राशी! अच्छे रिश्तों की वाक़ई ज़िंदगी में बहुत अहमियत है! कविता आपको उम्दा लगी, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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  2. वाकई खूबसूरत रिश्तों से ही हम जिंदगी में होते हैं मालामाल।
    बहुत सुंदर कविता लगी सर।🙏

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद आपका, ममता जी! अच्छा लगा कि आपको कविता अच्छी लगी!

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