जीवन पथ पर बढ़ता जा
गीत सुख समृद्धि के गा
जीवन एक अनमोल निधि
अगर तूँ जाने जीने की विधि
इसे कदापि न व्यर्थ गवाँ
जाने कब यह हो जाये हवा
यह पल ही है तेरा अपना
बाक़ी सब तो है एक सपना
जागृत हो इस क्षण के प्रति
दे जीवन को एक नवीन गति
अतीत का बोझा न उठा व्यर्थ
आज को संवारने में बन समर्थ
भूत भविष्य का चक्कर छोड़
निज जीवन को दे सार्थक मोड़
स्मरण रहे जीवन है नित नया
कभी भी न लौटे जो बीत गया
भविष्य के गर्भ में क्या जाने कौन
इस पल के समक्ष सब कुछ गौण
अविस्मरणीय हो कुछ ऐसा कर
पदचिह्न तेरे बनें अमिट अजर
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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