मुझे उस जहां की तलाश है
जहाँ खुश्क बंजर ज़मीं नहीं
दिल का दिल से सरोकार है
जहाँ हर ओर पनपती हैं मुहब्बतें
फ़न सब को दरकार है
सच के लिए खड़े होते लोग
जहाँ झूठ फ़रेब नागवार है
इंसान इंसान के साथ खड़ा
न कोई छोटा न कोई बड़ा
जहाँ मिट गईं हैं सरहदें
न जंगों से दुनिया बेहाल है
जहां प्यार की बहती तरंगें
नहीं नफ़रतों के दम घोंटू जाल हैं
जहाँ चैन का है हर ओर पासारा
न कोई बेचैनी का मारा बदहाल है
जहाँ सब को मिलती इज़्ज़त की रोटी
न सर पे छत का मुँह बायें खड़ा सवाल है
जहाँ बिकती नहीं हैं अस्मतें
न जान को लेकर बवाल है
साफ़ आब-ओ-हवा है मुहैया
न हर दम लेना जहाँ जंजाल है
मुझे उस जहां की तलाश है
मुझे उस जहां की तलाश है—
अरुण भगत
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