वे लोग अच्छे होते हैं
जो मन से बच्चे होते हैं
मन को यूँ भा जाते हैं
क्योंकि वे सच्चे होते हैं
इस कपटी दुनिया में
जो रह पाते हैं अबोध
वही जन ईश्वर को भाते
उन्हें है जीवनामृत का बोध
जो हैं सरल हृदय निष्पाप
छूता उन्हें न कोई संताप
जिस अनुकंपा को जग तरसे
वह प्रभु कृपा है उन पर बरसे
कमल भांति जो अछूते खिलते
ऐसे प्रभु प्यारे हैं दुर्लभ मिलते
बांह पसार ऐसे जन को मिलिए
उनकी संगत में पुष्पित हो खिलिए!
रचनाकार
अरुण भगत
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