कब?

खूबसूरत है वो लोग जो रंग भरते हैं रिश्तों में 

क्यों लगता है वो रह गए है सिर्फ़ क़िस्सों में 

क्यों बे-मुरव्वत सी  हो गई है ये सारी दुनिया

क्यों नहीं दिल खोल कर गाती अब कोई मुनिया

क्यों अब कोई खिलखिला के नहीं हंसता

क्यों कोई ख़ुशबू बन के दिल में नहीं बसता

क्यों अब शोर में भी है लगती अजब सी ख़ामोशी

कहाँ गया वो गले लगना वो सारी गर्मजोशी 

अब कब मोहब्बत साज़ छेड़ेगी,आएँगे वापस वो दिन

जब रह नहीं पाता था कोई दोस्त दोस्त के बिन 

जब अपनापन महकता था हर ओर फ़िज़ाओं में 

जब प्यार के बोल मिसरी बन घुलते थे हवाओं में 

अब कब वो खूबसूरत लोग क़िस्सों से बाहर आएंगे

दिलकश रंगों से फिर ज़िंदगी के कैनवस को सजायेंगे ?

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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