वक़्त कब किसके हाथ में आता है
कब ये अनभिज्ञ का साथ निभाता है?
इसका वेग सब कुछ बहा ले जाता है
काल चक्र के आगे कौन टिक पाता है?
समय की तलवार की तीखी है धार
कौन सह पाया है इसका प्रबल वार?
समय रहते जिसने जाना है मूल्य समय का
सफलता का उज्जवल मुकुट हुआ उसी का
समय ने उसी को अपना श्रेष्ठ शिष्य माना हैं
जिसने समय के अपार महत्व को जाना है
जिसने जीवन सागर में किए हैं पल-पल के मोती संचित,
समय की आशीष से वह नहीं रहा कभी भी वंचित,
जिसने इस परम सत्य को किया है आत्मसात्
जीवन रणभूमि में नहीं हुई है कभी उसकी मात
यही तो है इस जीवन का गहन ज्ञान
विवेकशील मानव लेते जिसका संज्ञान
यहीं से होती सफलता की ऊँची उड़ान आरंभ
यहीं से होता है सबल सार्थक जीवन प्रारंभ!
अरुण भगत
सर्वाधिकार सुरक्षित
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Nice♥️
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Thank you very much, Sahil dear! God bless you!
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