न जाने क्यों दिल उदास रहता है

न जाने क्यों दिल उदास रहता है

कोई तो ग़म है जो मेरे पास रहता हैं

कोई तो ख़लिश है जो सोने नहीं देती

बहुत क़रीब किसी के होने नहीं देती

कोई फ़िक्र खाए जाती है घुन की तरह

दिल चीरती इक मायूस धुन की तरह

कोई तो भारी पत्थर है मेरी रूह पर

जो बयान न हो पाए किसी के मुँह पर

कोई तो चुभन है इक शूल जैसी

आँखों को बदहाल करती धूल जैसी

न जाने क्यों दिल उदास रहता है

कोई तो ग़म है जो मेरे पास रहता है

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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