
तवज्जो दीजिए इस बात पे, करिए गौर
हर बेरंग ज़िंदगी हो रंगों से सराबोर
हर बस्ती में बिखरें ख़ुशनुमा रंग
ऐसा हो हमारा सलीका, ऐसे ढंग
आसमां में बिछती रोज़ रंगों की बिसात
ऐसा ही हो ज़मीं पे, पाएँ ग़मों से निज़ात
रूह में जो उतर जाएं खूबसूरत रंग
मिट जाए हर बदसूरती, ख़त्म हो हर ज़ंग
आओ होली के दिन मांगें ख़ुदा से ख़ैर
मिट जाए हर दरिंदगी, ख़त्म हों सब वैर
रंगों की बरसात करे फ़लक से हर बदरिया
रूहानी रंगों से रंग जाए हमरी देह की चदरिया
यही होली का पैग़ाम, यही इस दिन का सबब
यही सीख ही तो देता दुनिया का हर मज़हब
अरुण भगत
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