कौन है जो प्यार के दो मीठे बोल बोलेगा
ज़ख्मों पर लगाएगा मरहम, मन की गिरहें खोलेगा
कौन है जो जान अपना अंतर्मन में झांकेगा
कौन है जो मेरे एहसासों की सही क़ीमत को आंकेगा
कौन है जो मोहब्बत से सहलाएगा मेरा मस्तक
और मुद्दत से बंद दिल के दरवाज़ों पर देगा दस्तक
कौन है जो होगा रूबरू मेरी रूह से जान अपना
कौन है जो रखता है तौफ़ीक़ सच करने की ये मीठा सपना
कौन है हमदर्द जो सुनेगा मेरी ज़िंदगी की नागवार कहानी
जो दिल को देगा सकूँ और मेरी रूह को रवानी
कौन है वो फ़रिश्ता जो इंसानी भेस में आएगा
और मेरे पस्त पड़े हौंसलों को एक नई बुलंदी देकर जाएगा
आख़िर कौन है वो?
अरुण भगत
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