मन, तू हिम्मत न हार
अपने भय पर कर प्रहार
हो जाएगा बेड़ा पार
निर्भयता की जोत जला
टल जाएगी हर एक बला
आत्मविश्वास का बना सेतु
कुछ न कर पाएँगे राहु-केतु
दृढ़ निश्चय कर बढ़ जा आगे
देख कैसे सब संशय भागें
तेरे घट में बैठे प्रभु राम
रमा ले मन में उनका नाम
उनकी कृपा को बना ले ढाल
कोई न कर सके बाँका बाल
सद्कर्मों का उद्घोष तू कर
हर सद्गुण को निश्चय कर वर
सबल चरित्र के भर जीवन में रंग
दैवी शक्तियाँ हो लेंगी तेरे संग
ख़त्म होगा भय-भ्रम का फेरा
सफल होगा दुर्लभ जीवन तेरा !
अरुण भगत
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