निर्भय हो आगे बढ़ो
सत्य सीढ़ी पर चढ़ो
निष्ठा को बनाओ ढाल
असत्य का बेंधो हर जाल
अहंकार पर करो प्रहार
स्वार्थ न हो सर पर सवार
कायर बन न हर दिन मरो
न अकारण ही तुम डरो
ज्ञान का दीपक जलाओ
जीवन को सार्थक बनाओ
बलिष्ठ बनो और बनो समर्थ
अमूल्य जीवन न हो जाए व्यर्थ
हर बाधा को तुम जाओ लांघ
उज्जवल भविष्य की है यह माँग
जीवन सिंधु में उतारो नाँव
हो हर तूफ़ान से लड़ने का चाव
सुलझाओ जीवन के उलझे धागे
निर्भय हो तुम बढ़ जाओ आगे
रक्षा के लिए जो लगाए गुहार
हर उस दीन की सुनो पुकार
रखो दृढ़ निश्चय, सच्ची लगन
होंगे तुम्हारे ये धरा और गगन
अरुण भगत
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