दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम

दोस्त, फ़ुरसत में कभी आना तुम

सकूँ भरे लम्हे साथ लाना तुम

इत्मीनान से बातें दो-चार करेंगे

ज़िंदगी के कैनवस में नए रंग भरेंगे

पुरानी मीठी यादें ताज़ा करेंगे

मिल बैठ उनमें इक नई रूह भरेंगे

ठंडे पड़ गए रिश्तों में फूँकेंगे नई जान

मिल जाए जैसे हीरों की कोई ख़ान

आबाद करेंगे फिर दिल की वीरां बस्ती

पहले सी ही मौज करेंगे, थोड़ी सी मस्ती

आओगे जब ओढ़कर प्यार का लबादा गर्म

सख़्त पड़ गए एहसास भी शायद हो जाएँ नर्म

आओगे तो जाग जाएँगी सोई हुई ये रातें

तारों भरे आसमाँ से जब मिल करेंगे बातें

दोस्त, फ़ुरसत में ज़रूर कभी आना तुम

गर्मजोशी की सौग़ात साथ लाना तुम

अनकहे क़िस्सों को मिल जाएगी ज़ुबान

ज़िंदगी हासिल करेगी इक बेहतरीन मुक़ाम

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

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Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

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