सादा जीवन, उच्च विचार,
निर्मल मन, उत्तम व्यवहार,
सादा व्यक्ति सब से न्यारा,
ईश्वर को वह सबसे प्यारा,
जो सीधा-सादा और हो नेक,
उसके पास अमूल्य निधि है एक,
लोग चाहे हों उसपे हंसते,
उसके संग प्रभु हैं बसते,
उसकी सुध हैं ईश्वर लेते,
दोनो हाथों से उसको देते,
उसपर समस्त सृष्टि की छाया,
यही तो है सादगी की माया,
सादे की प्रभु रखते लाज,
उसके संवारें वह सब काज,
ज्ञानी जनों का यह कहना,
सादगी से बड़ा न कोई गहना,
कपटियों का चले चाहे कितना भी ज़ोर,
सादगी से बढ़कर नहीं कुछ और,
जिसने इस सत्य को है जाना,
सफल उसी का जाग में आना!
अरुण भगत
स्वरचित रचना
सर्वाधिकार सुरक्षित
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👌❣️
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Thank you very much,dear! I owe special thanks to you since you are always the first or among the first ones to respond when I write and publish something on my blog! Stay blessed.
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I agree! To be simple is to be happy in every situation. A simpleton is God’s chosen sheep. NICE!!👌👏👏
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Manjula Ji, Thanks for your kind response and your enlightened endorsement of the essence of the poem! Stay blessed.
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एकदम सत्य प्रफेसर साहेब! सरल तथा सीधा जीवन जीने वाले ही प्रभु के प्रिय होतें हैं। छल कपट करने वाले लोग प्रभु को स्वीकृत नही हैं।
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आपके जागृत अनुमोदन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, भाई! स्वस्थ रहिए, खुश रहिए!
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बहुत सुंदर और सत्य बात बताई है सर आपने ।🙏🙏🙏💐💐💐
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बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! खुश रहिए!
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सरलता सीधा ईश्वर से जोड़ती है! पवित्र हृदय प्रभु का निवासस्थान बन जाता है!
श्रेष्ठ रचना , सर !
Congratulations!💐💐👌
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बहुत बहुत धन्यवाद, मंजुला जी! रचना आपको इसलिए श्रेष्ठ लगी क्योंकि वह आपकी श्रेष्ठ सोच से शायद थोड़ा बहुत मेल खाती है। आपकी श्रेष्ठ सोच के लिए आपको साधुवाद!
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