ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है,
हर दुश्वारी से जूझना है, हालातों से लड़ना है,
इस जद्दोजहद में ही तो है ज़िंदगी का मज़ा,
लहरायेगा तेरा परचम ग़र होगी रब की रज़ा,
न हिम्मत तूँ हार और ग़म न कर,
न घुट-घुट के बार-बार तूँ मर,
जाँबाज़ बन, शिद्दत से तूँ जी,
रुसवाई का भी हर प्याला मुस्कुरा के तूँ पी,
शिकस्त हुई है आज, तो कल होगी बेशक जीत,
यही दुनिया की रवायत , यही है इसकी रीत,
याद रख, ज़िंदगी तुम्हें आज़माएगी बार-बार,
सब्र से सह हर वार, बेड़ा होगा तेरा पार,
याद रख, तेरा ख़ुदा है हरदम तेरे साथ,
क्यों हो फ़िक्र ग़र सर पे है उसका हाथ,
और फिर तेरे साथ हैं बेशुमार दुआएँ,
तपती दुपहर में ज्यों ठंडी हवाएँ,
ग़म न कर, अभी बहुत कुछ करना है,
ज़िंदगी का प्याला अभी मायनों से भरना है!
अरुण भगत
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AMAZING LINES SIR❣️😍
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Thank you very much, dear! Stay blessed.
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Wonderful sir
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Thank you very much, Narender Ji, for your kind appreciation! God bless you!
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बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। धन्यवाद सर👌👌👌🙏
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बहुत बहुत धन्यवाद, ममता जी! जीती रहिए!
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बहुत खूब Sir👌👌👌💐💐
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बहुत बहुत शुक्रिया, मीनाक्षी मैडम, आपके उत्साहवर्धन के लिए ! जीती रहिए!
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अति सुंदर! ज़िंदगी में गिरना और फिर उठना, यही प्रकृति का नियम है। बिना आग में तपे तो लोहा भी नहीं निखरता!
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ख़ुदा पर भरोसा रख हिम्मत और उम्मीद से आगे बढ़ने का नाम ही ज़िंदगी है! सही कहा आपने, भाई! कविता की प्रशंसा के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया!
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Well written sir😊😊❤️❤️👍👍
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Thanks a lot, Bhola dear! God bless you!
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Waha… 👌👌👌
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शुक्रिया, अंकित जी! जीते रहिए!
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