Design a site like this with WordPress.com
Get started

करें जागृत भीतर के बुद्ध

जीवित होने का उत्सव मनाएँ,

प्रेम की अविरल गंगा बहाएँ,

सब को अपने गले लगाएँ,

जीवन-सार समझें-समझाएँ,

जीवन का हर पल अनमोल,

कौन है जाने इसका मोल,

पल में है जीवन अपार,

पल में हो हो जाए बेड़ा पार,

इस क्षण की महिमा जिसने जानी,

वही पंडित और वही है ज्ञानी,

पल में प्रगट होती सृष्टि,

पल दे सकता दिव्य-दृष्टि,

पल कर सकता है सब कुछ खंडित,

पल कर सकता महिमा-मंडित,

इस पल को अपना सब कुछ जानें,

जीवन का अंतिम सत्य इसे मानें,

इसकी संभावनाओं को करें साकार,

स्व-अस्तित्व को दें उज्वल आकार,

हो व्यापक सोच और आचरण शुद्ध,

करें जागृत भीतर के बुद्ध,

तभी होगा सार्थक मानव-परिधान,

जब तजेंगे मोह अभिमान,

और तजेंगे मूढ़-बुद्धि,

तभी होगी आत्म-शुद्धि,

जब बनेंगे गुणों की ख़ान,

संभव तब होगा अमृत-पान!

अरुण भगत

सर्वाधिकार सुरक्षित

#arunbhagatwrites#poetry# poeticoutpourings#outpouringsof myheart#writer#Indianwriter#englishpoetry#hindipoetry

Advertisement

Published by Arun Bhagat

I love to talk through my writings.@

8 thoughts on “करें जागृत भीतर के बुद्ध

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: